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खुशखबरी: Post Office TD Vs SBI FD: निवेशक ध्यान दें! हर 10 लाख जमा पर डाकघर में 82,222 रु मिलेंगे ज्यादा

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Post Office TD Vs SBI FD: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) छोटी बचत योजना के लिए पॉपुलर विकल्प है, जिसमें रिटर्न की गारंटी मिलती है. इसलिए बाजार का रिस्क बिल्कुल भी सहन न करने वाले निवेशकों का भरोसा आज भी एफडी पर बहुत ज्यादा है. टैक्स सेवर विकल्प होने के नाते यह और आकर्षक हो जाता है. देश के ज्यादातर छोटे और बड़े, सरकारी और निजी बैंक एफडी करने की सुविधा देते हैं. इनका टेन्योर 7 दिन से 10 साल हो सकता है. बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के साथ ही पोस्ट आफिस यानी डाकघर में भी 1 साल से 5 साल की एफडी की सुविधा मिलती है. डाकघर में इसे टाइम डिपॉजिट स्कीम कहते हैं.



आमतौर पर बहुत से ग्राहक उसी बैंक में एफडी कर देते हैं, जिनमें उनका खाता है. यह संभावना बड़े बैंकों के मामले और ज्यादा होती है. यानी एसबीआई जैसे देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक में खाता है तो बहुत से ग्राहक एफडी करनी होती है तो एसबीआई ही चुनेंगे. ऐसा दूसरे बैंकों के मामले भी होता है. लेकिन यह सही स्ट्रैटेजी नहीं हो सकती है. डाकघर में 5 साल की एफडी पर एसबीआई की तुलना में 1.3 फीसदी सालाना ज्यादा ब्याज मिल रहा है. वहीं, डाकघर में आपका 100 फीसदी निवेश भी सुरक्षित होता है. क्योंकि वहां जमा पर सरकार की सॉवरेन गारंटी होती है.

कैलकुलेशन: डाकघर
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की रकम: 10 साल
टेन्योर: 5 साल
ब्याज दर: 6.7 फीसदी सालाना
मेच्योरिटी पर रकम: 13,83,000 रुपये



कैलकुलेशन: स्टेट बैंक आफ इंडिया
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की रकम: 10 साल
टेन्योर: 5 साल
ब्याज दर: 5.4 फीसदी सालाना
मेच्योरिटी पर रकम: 13,00,778 रुपये

कहां मिला ज्यादा फायदा
यहां 10 लाख की 5 साल के लिए डाकघर में एफडी करने पर मेच्योरिटी पर रकम 13,83,000 रुपये हो रही है. जबकि एसबीआई में 5 साल के लिए एफडी करने पर मेच्योरिटी पर रकम 13,00,778 रुपये हो रही है. साफ है कि एसबीआई के मुकाबले डाकघर में आपको 82222
रुपये का फायदा हो रहा है.



डाकघर टाइम डिपॉजिट स्कीम की खासियत
डाकघर में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की एफडी की सुविधा है, जिन पर 5.5 फीसदी से 6.7 फीसदी सालाना ब्याज है.

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इसे सिंगल और ज्वॉइट अकाउंट के रूप में खोला जा सकता है. ज्वॉइंट अकाउंट में अधिकतम 3 वयस्क हो सकते हैं.

10 साल से ज्यादा उम्र के नाबालिग बच्चे के नाम पर भी अभिभाव की देख रेख में अकाउंट खुल सकता है.

एक डाकघर में कितने भी अकाउंट खोले जा सकते हैं. अकाउंट खोलते समय या बाद में नॉमिनेशन की सुविधा है.



अकाउंट एक डाकघर से दूसरे डाकघर आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता है.

सिंगल अकाउंट का ज्वॉइंट अकाउंट में बदला जा सकता है.

5 साल की मेच्योरिटी के बाद इसे और 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है.
प्री मेच्योर पैसा निकालने पर पेनल्टी का प्रावधान है.

5 साल की एफडी में 1.5 लाख रुपये तक निवेश को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ मिलता है.

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